じっちゃんの名にかけて

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数年ぶりに、『少年マガジン』を手に取った。

買ったのではない。
地下鉄の棚に放置されていたのだ。

20年前は、毎週買っていた。
10年前は、立ち読みで済ませるようになった。
やがてコンビニの漫画雑誌には紐がかけられ、立ち読みはできなくなった(それはそれで、悪い事ではないと思う)。

ペラペラとめくってみると、知っている漫画は『金田一少年の事件簿』だけになっていた。

しかし、『金田一少年~』を一話だけ読んでも、ちっとも面白くない。
そりゃそうだ。
来週もマガジンを手に取り、この事件の結末を自分が知ることはないと、わかっているからだ。


漫画雑誌の手触りと、紙のにおいが、とても懐かしかった。



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濃紺

Author:濃紺
◆1971年生まれ。廃人寸前からサラリーマンへ奇跡の転身。 音楽好き。愛すべき80年代カルチャーを礎に、現在を生き未来を感じたい。東京→仙台→札幌→福岡。

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