緊張と緩和の振子

満身創痍ってほど、大したことではない。
一山越えたってほど、達成感はない。
「山に登って、下りてきた」そんなところだ。

少しばかりの解放感はあるのだが、つきまとう不安感。
なんだろね、このモヤモヤした感じ。

期末テストが終わった瞬間の気分に、少し似ている。
結果はどうあれ、とりあえず終わった。
やれることは、やった…はずだ。
はずか?本当か?まあ、今更どっちでもいいけどな。
どっちでもいいというか、どうにもならないけどな。
終わっちまったんだし。
そうだ。終わったんだ。

「その件」は終わった。
しかし、喉に魚の骨が引っかかっているような感覚。
歯の間にトウモロコシの薄皮が挟まっているような感覚。

それでも、今夜はゆっくり眠れる。
なるべく何も考えないで眠ってやる。

とても長い一日だった。
早朝に、ふくらはぎが攣(つ)って目が覚めた。
随分前のことのように感じる。
今もまだ残る、ふくらはぎの痛みは、「今日が存在した証」だ。

缶ビールを一気に飲み干してみたが、今夜は何か違うんだ。
おかしいな。
こんな時はビールが美味しいはずなのに。

wilkinson0608.jpg

きっと今夜は酒じゃねえんだな。


「その件」は終わった。
ネクスト。
また明日。

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haunted days

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濃紺

Author:濃紺
◆1971年生まれ。廃人寸前からサラリーマンへ奇跡の転身。 音楽好き。愛すべき80年代カルチャーを礎に、現在を生き未来を感じたい。東京→仙台→札幌→福岡。

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