ニャン2倶楽部

自販機でコーラを買った。
ふと足元を見ると、雑誌が落ちている。

成人向け雑誌。
平たく言うところの「エロ本」である。

表紙には水着の女性。
「若奥様、乱れる午後」みたいな扇情的なコピーが並ぶ。
こういうコピーのセンスって、昔も今も変わらないんだな。

そういや、エロ本なんて、軽く20年以上は買っていないなあ。

私がエロ本を嗜んでいたのは、中高生の頃である。
それからはAVにお世話になる時代になり、やがてビデオからDVDに、今ではネットで気楽にエロスに触れることが出来る。

それでも、エロ「本」は存在し続けている。
どこのコンビニにも、成人向け雑誌のコーナーがあるくらいだ。

いやいや、「風俗情報誌」のニーズは解るのよ。
あれは、リサーチの為のツールだろ?

純粋なエロスといての、雑誌が存在し続けていることに、ある意味びっくりなのだ。
紙媒体の衰退著しい昨今であるが、エロ本は、それなりに安定したマーケットってことだよね。

私はコーラを飲みながら、風に吹かれてパタパタとなびく、エロ本の表紙をしばらく眺めていたのだった。

表紙の女性の安っぽい笑顔を見て、久し振りにエロ本を買ってみるのも、悪くないのかな…なんて思っていた。
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コメント

じゃぁ

新聞もなくならないね?

No title

■ゴリラさん
でしょうね。
新聞の場合、複雑な利権も絡んでいるような気がします。
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haunted days

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濃紺

Author:濃紺
◆1971年生まれ。廃人寸前からサラリーマンへ奇跡の転身。 音楽好き。愛すべき80年代カルチャーを礎に、現在を生き未来を感じたい。東京→仙台→札幌→福岡。

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